Tuesday, December 09, 2008

ये शादी

खुश है बराती
खुश है साम्भंदी,
है पटको की गूंज हर कही
मिठाई है बट रही हर कही
आज झिलमिल है सजा जहान
सहमी हुई सी बेठी वो दुल्हन
ऑखो में समाय उसके आसु
दे रहे बघांयॉ सब
पर क्या किसी ने पुछा उससे
की क्या है उससे ये मंजूर?
विदा कर ले जाया जायेगा उसे आज
और दिल में रह जायेगा उसके सदा ये आसू आज.

1 comment:

  1. You are implying that she is getting married with our her consent or just feeling left behind when the rest of the marriage chores are takings its course around so loud and colorful, with both gala and tears... ?! either way, some one is losing and gaining in the concept of marriage. I am still trying to understand why does it even exist in our society. -Morgan.


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