Monday, June 23, 2008

मेरे हिस्से की दे देना उसे खुशी

लेके नम तेरा
थमा था हाथ मैंने उसका
चोखट पे खड़े तेरे
जिंदगी उस के नाम करने का लिया था वादा
देख के तेरी राजा मंजूरी
सोचा, येही राह चुनी नाम तुने मेरी
फिर क्यों हे आज ऑंखें नम मेरी?
दिल में हे ये दर्द समाया क्यों?
थमा था जिसका हाथ सामने तेरे
हो गया हे कहाँ वो घूम?
हंस लेती हु फिर भी,
सोच के की यह मोड़ राह में मेरे
हे लिखी तुने ही
पुचुंगी तुझे
की क्यों दीमुझे वो खुशी
अगर चाँद लम्हों में थी छीननी?
रहूंगी सदा आभारी की
चाँद लम्हे ही सही
एक चोटी से आख़िर दी मुझे तुने खुशी
आँखे मीचे चलूंगी उस राह पे
जो तुने मेरे नाम हे लिखी
पर,
जिसके साथ जिंदगी चलने का किया था वादा
कम करना उस की कोई भी खुशी
हर खुशी मेरे हिस्से की
दे देना सजा के तोहफे में उसे !


1 comment:

  1. Love is blind - has its meeting in more ways than one.. and here is one of it.. इराधे नेक है मगर जरूरी नहीं कि सब त्याग दें :) - Morgan.

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